DUKH KA KARAN

दुःख का कारण। 

अरे में तो बहुत दुखी हु।भगवान ने सारे  दुःख मुझे ही दिए है। मुझे उस इंसान ने ये बोला उसने ये कह दिया में तो अच्छा इंसान हु। मेरे  साथ ही ऐसा क्यूँ होता है। 
क्यूँ भई ऐसा क्यों है। 
चलो पहले एक कौवे की बात सुन लेते है। 
हमारी तरह एक बहुत दुखी कौवा था। 
दुखी क्यु था चलो देखते है। 

एक कौवा सोच रहा था की उसका रूप अच्छा नहीं है। उसकी आवाज भी अच्छी नहीं है। उसकी भी कोई जिंदगी भगवान ने उसे कुछ भी अच्छा नहीं दिया। उसका भी दुखी होना जायज है। भई रूप अच्छा नहीं आवाज अच्छी नहीं जहाँ जाता वहाँ से भगा दिया जाता। इससे बड़ा दुःख भला और क्या होगा। 
उसने सोचा मुझसे अच्छी किसमत तो कोयल की है। जिसकी इतनी प्यारी आवाज है। इतनी प्यारी आवाज पाकर तो कोई भी खुश होगा। यही सोचकर वह कोयल के पास जाता है और कहता है की तुम्हारी इतनी प्यारी आवाज है। तुम तो बहुत खुश होगी  क्यूकि मेरी आवाज तो बहुत ख़राब है। कोयल बोली कहाँ खुश हूँ। मुझसे खुश तो तोता है। जिसकी आवाज भी प्यारी है। उसके पास रूप है रंग यही मेरे पास तो एक ही रंग है।


 उसके पास दो रंग है। मुझसे खुश तो वह है। 
कौवे ने सोचा चलो भई तोते से पूछते है वही होगा सबसे खुश उसके पास रूप भी है रंग भी है आवाज भी है। 
कौवे महाराज अब चल दिए तोते की तरफ। 
अब कौवा तोते के पास पहुच गया और तोते से पूछा भाई तुम्हारे पास अच्छी आवाज है। अच्छा रूप है। तुम दुनिया के सबसे खुशकिस्मत पक्षी हो। 



तोता बोला मेरे पास तो सिर्फ दो ही रंग है। मोर के पास तो बहुत से रंग है। और उसकी बोली भी अच्छी है। मै कहा खुश मुझसे खुश तो मोर है। उसकी किस्मत मुझसे अच्छी है। कौवे ने सोचा ये बात तो है मोर की आवाज भी अच्छी है और उसके पास तो कई रंग है। पक्का वही सबसे खुश होगा। 
इसी विचार में वह मोर से मिलने चल दिया। और मोर के पास पहुंच गया मोर के पास जाकर मोर से बोला भाई तुम दुनिया के सबसे खुशकिस्मत पक्षी हो। मोर ने कहा भाई ऐसा क्यूँ बोल रहे हो। कोवा बोला भाई तुम्हारी आवाज भी है तुम्हारे पास इतने रंग भी है। तुम कितने खुशकिस्मत हो और कितने ख़ुशी इंसान हो। इस पर मोर बोला मुझसे खुश तो कोवा है। उसकी ये बात सुनकर कौवे के होश उड़ गए। 
कोवा थोड़े होश में आया और बोला भाई क्यू मजाक कर रहे हो। में सबसे खुश कैसे हु। 

तो मोर बोला तुम खुश हो क्युकी तुम आज़ाद हो आज तक किसी चिड़ियाघर में मेने किसी कौवे को कैद में नहीं देखा। 
इतनी आज़ादी में भी कोई खुश नहीं होगा तो कैसे खुश होगा। 
कौवा सोच में पड़ गया। में आज़ाद हु। जहाँ चाहू जा सकता हूँ। मेरी आवाज और रूप रंग से क्या फर्क पड़ता है। 
कोवा  ऊंचा उड़ता जा रहा था और बहुत खुश था क्युकी आज उसे ख़ुशी के असली मायने समझ में आ गए। उसे समझ में  गया असली ख़ुशी क्या क्युकी वो उन बातो के लिए दुखी था जो दुःख की वजह थी ही नहीं। 
और आजकल हम सब की  सबसे बड़ी समस्या यही है हम बेवजह दुःखी रहते टेंशन में रहते भगवान ने हमे जैसा भी बनाया है हम अपने आप में सम्पूर्ण है। ऐसी कोई वजह नहीं है जिसके लिए हम दुखी हो। 
इसलिए हमे दुसरो से तुलना करके खुद को दुखी नहीं करना है। 
हमे भगवान का शुक्रिया करना चाहिए उसने हमे जो भी दिया बहुत अच्छा दिया है। 
इसलिए खुश रहिये जिंदगी का आनंद लीजिये। 

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